Wednesday, 28 March 2012

KYA BAAT HAI !

Wah re "SATTA" (POLITICS) , kya baat hai !
Kahin Gunda raaj , kahin bhrashtachariyon ka saath hai, 


Kabhi 2G ka ghotala , 
kabhi sansad main PORN dekh, desh ka muh kaala ker daala,


Kahin Moortiyon per chaadar daalker, bagawat ka beej boya,
Kahin ek chaddar ko tarasta footpath per ek gareeb, odh aasmaan soya,


Jo nahin hua kabhi, shayad woh ab akhbaar main aayega,
Chor Lucchakkon ki kero kadar , na jaane kon kis sarkaar main aayega,


Swaad hai chakha crore kaa, bada aashirwaad hai ,
Per waqt nahin rehta kisika thamker, shayad iss baat se tu agyaat hai!


Waah SATTA kya baat hai !





Thursday, 2 December 2010

KUCH DHOOND RAHI THI MAIN......?

SAB kuch toh hai mere paas ..per kuch dhund rahi thi main ....
Ishwar ne diya hai sab kuch mujhe ..per jaane kya dhund rahi thi main ...
kuch aisa jo ho sagar main moti jaisa ...
kuch aisa jisko khareed naa sake paisa ....
kuch aisa jiski koi keemat naa ho ...
kisi bhi bandhan main wo seemit naa ho ..
kuch aisa jo ho vishaal  aasmaan main udhane ke baad chidiya ko mile ek tinke jaisa ....
jab ek majdoor din bhar ki mehnat se kuch sikke kamaata hai ...
main dhund rahi thi kuch aisa ...jo ho un sikkon ko kamane ki khushi jaisa ....
kuch aisa jo ho sadiyon se sukhi padi zameen per ....
do boond barsaat jaisa ...
kuch aisa jo ho aakhiri saans leti zindagi ko mili dhadkan jaisa ....
zindagi bher andhera dekhti aankhon ko mili roshni jaisa ...
Main dhoond rahi thi kuch aisa ....jise khareed naa sake paisa ....



KHUSHIYON KI LUKA CHIPI YE ZINDAGI



बड़ी अजब सी..बड़ी गज़ब सी है ये ज़िन्दगी..


खुशियों की बरसात..और दुःख की आंधी मुट्ठी मैं रेत सी फिसलती ये ज़िन्दगी...


दुनिया कहे की सबको एक सा समझती है ये ज़िन्दगी..


पर मुझे क्यों लगता है..की हर घडी रूप बदलती है ये ज़िन्दगी...


रात को सो जाने पर..लगता नहीं की सुबह मिलेगी ये ज़िन्दगी..


सुबह उठने पर लगता नहीं की कब तक चलेगी ये ज़िन्दगी.....


कभी चाबी के खिलोने सी हंसती ये ज़िन्दगी.....


कभी मिटटी की गुडिया सी टूटती ये ज़िन्दगी...


अनगिनत रूप हैं इसके पर...फिर भी जी रहे हैं ये ज़िन्दगी..


आज है कल नहीं..बर्फ सी पिघलती ये ज़िन्दगी...


घर मैं खुशियों के दीप जलाती ये ज़िन्दगी..


ICU मैं आखिरी सांस लेती ये ज़िन्दगी.......


जी लो हर पल को.वरना पता नहीं कब धोखा दे दे ये ज़िन्दगी.........

Wednesday, 1 December 2010

YE HAI JALWA MEDIA KAA

कुछ दिनों पहले EAST DELHI मैं एक इमारत गिर गयी ...काफी हल्ला हुआ कई लोग भी मर गए कुछ ज़ख़्मी भी हुए...शाम का 
वक़्त था....चारों तरफ अफरा तफरी मची हुई थी....मैंने ऑफिस से वापस आकर जैसे ही न्यूज़ चैनल लगाये...सभी पर कोई न कोई न्यूज़ थी..सिर्फ एक चैनल इस न्यूज़ को कवर कर रहा था...

दिल मैं जैसे दहशत बैठ गयी की कोई जानकार ना हो...गरीबों का क्या होगा? चैनल PER बार बार एक ही बात...इस समाचार  को सबसे पहले हमने दिखाया है....चलिए सीधे आपको अपने रिपोर्टर के पास लिए चलते हैं......मेरी नज़र वहीँ RUK गयी पानी का ग्लास टेबल PER जैसे का तेसा रख दिया...दिमाग जैसे सुन्न PADH चुका था.....रिपोर्टर से चैनल द्वारा बोला गया की घटनास्थल से किसी से लाइव बात करवा दें...रिपोर्टर ने भी किसी को पकड़ लिया और बेतुके सवाल करने लगी....जैसे की  इमारत कितनी पुरानी थी?...कितने लोग इसमें रहते थे? आपको क्या लगता है कितने लोग इसमें फंसे होंगे? वगेराह वगेराह......


जिस इंसान को REPORTER ने अपनी बातों मैं लगा रखा था वो बेचारा बोलता जा रहा था......मैडम आपसे गुज़ारिश है मेरे INTERVIEW मैं वक़्त बर्बाद ना करें.....जल्दी से कुछ करवाएं यहाँ इस वक़्त लोगों की जिंदिगी बड़ी कीमती है.....पर रिपोर्टर ने कहाँ सुन न था?......एक ही बात को बार बार सुना रही थी ...हमने इस दुर्घटना को सबसे पहले कवर किया है.......खैर काफी देर के बाद सुनवाई हुई पर दिल मैं एक टीस सी उठी...क्या मीडिया भी आम आदमी की पहुँच से उपर चला गया?......शर्म करो हम किसपर भरोसा करें?...शायद अब वक़्त की दरकार यही है की खुदी को KER बुलंद ITNA...की खुदा भी तुझसे यही पूछे की बता तेरी RAZA क्या है........अगर आस पास के लोग उनकी मदद के लिए नहीं आते तोह शायद नुक्सान इतना होता जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती....

Sunday, 28 March 2010

PAINFUL EXPERIENCE

One fine morning i was walking down a lane
There was a pain in my heart that i could not sustain
My experience last night was very painful
The pain was actually not physical
But still the situation was critical
I am talking about an old servant of mine
Last night he told me his wife is not very fine
He was working with us from past 2 yrs
I called him Baba n thus could not see his eyes full of tears
I rushed with him to the government hospital in a near by village
His wife was admitted there n irony here a hospital in a lane with sewage
The moment i entered there was such a stinking smell
I wondered how in such an environment a person could feel well
The patients were lying on the floor groaning in pain
They were appearing so weak, I wondered if they ever had a grain
I headed towards the dark room where his wife was admitted
Looking pale and down I wondered if she was ever treated
The situation there was worst it was a pathetic sight
But what to do most of the hospitals have the same plight
Promises are made to the poor but not kept
Friends come lets join our hands and improve their condition
Believe me or not it is indeed a serious situation.

Saturday, 20 March 2010

GAREEBON KE LIYE BHI SOCHEN.......



रोजाना जो खाना खाते हो वो पसंद नहीं आता ? उकता गये ?............ ... ........... .....थोड़ा पिज्जा कैसा रहेगा ?

नहीं ??? ओके ......... पास्ता ?
नहीं ?? .. इसके बारे में क्या सोचते हैं ? --> आज ये खाने का भी मन नहीं ? ... ओके .. क्या इस मेक्सिकन खाने को आजमायें ?दुबारा नहीं ? कोई समस्या नहीं .... हमारे पास कुछ और भी विकल्प हैं........
ह्म्म्मम्म्म्म ... चाइनीज ????? ??ओके .. हमें भारतीय खाना देखना चाहिए ....... J ? दक्षिण भारतीय व्यंजन ना ??? उत्तर भारतीय ?या केवल पके हुए मुर्गे के कुछ टुकड़े ?
आप इनमें से कुछ भी ले सकते हैं ...


मगर .. इन gareebलोगों के पास कोई विकल्प नहीं है ...इन्हें तो बस थोड़ा सा खाना चाहिए ताकि ये जिन्दा रह सकें ..........



इनके बारे में अगली बार तब सोचना जब आप किसी केफेटेरिया या होटल में यह कह कर खाना फैंक रहे होंगे कि यह स्वाद नहीं है !!
इनके बारे में अगली बार सोचना जब आप यह कह रहे हों ... यहाँ की रोटी इतनी सख्त है कि खायी ही नहीं जाती.........
कृपया खाने के अपव्यय को रोकिये
अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी / समारोह हो और खाना बच जाये या बेकार जा रहा हो तो बिना झिझके आप 1098 (केवल भारत में )पर फ़ोन करें - यह एक मजाक नहीं है - यह चाइल्ड हेल्पलाइन है । वे आयेंगे और भोजन एकत्रित करके ले जायेंगे।
कृप्या इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें इससे उन बच्चों का पेट भर सकता है 'मदद करने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठो से अच्छे होते हैं '













bykapil sir my teacher ऑफ़ guitarmonk .

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Friday, 19 March 2010

है ये कहानी बहुत purani
जब से सत्ता मैं थे राजा -रानी
फिर ये कहानी धीरे धीरे बढ़ी आगे
बस फर्क इतना है अब राजा के स्थान पर देश को नेता खा गए
देश को खाने का सिलसिला तो बहुत पुराना है
मुझे toh आपको बस कुछ याद दिलाना है
एक वक़्त पर भारत था सोने की चिड़िया
मगर इन जालिमों ने तो उसे भी बेच दिया
इनका कहना है की ये हमारे साथ सदा हैं 
झूट बोलकर वोट मांगना तोह इनकी अदा है
जाने कितने लोगों को इन्होने लूट खाया है
और कहते हैं सेवा करके ही तोह हमने अपना घर बनाया है
वादा किया गरीबों से हमें वोट दो हम तुम्हे घर देंगे  
झूट बोला की तुम्हारी सूनी झोलियों को धन से भर देंगे
आज भी कई begher chat dhund रहे हैं यहाँ वहां
मगर इन सत्ता के पुजारियों को एक दुसरे की टांग खींचने से फुर्सत कहाँ
अरे इंसान तो छोडिये इन्होने तो भगवान् को भी नहीं बक्शा
अपनी आपसी बेहेस मैं राम मंदिर का भी बदल दिया नक्षा
हमसे करते गए झूठा वादा
महंगाई को गिराएंगे
सिर्फ पैसा ही नहीं
ये तोह आम आदमी को भी नोच खायेंगे
कहते हैं सीना तान के
कभी छोड़ा नहीं हमने एक भी अपराधी
अरे छोड़ेंगे कैसे बना जो लिया उसे अपना साथी
इनका कुछ पता नहीं खुद ही इतना confused   रहते हैं
खुनी को जनता के सामने अपराधी और पीठ पीछे अपना दोस्त कहते हैं
कभी कहते हैं दुनिया के साथ आगे बढेंगे
भारत को माडर्न बनायेंगे 
तोह कभी कहते हैं angregi का विरोध करेंगे
और multi  नेशनल को देश से bhagayenge
चंदा मांगकर बनायीं है इन्होने करारे नोटों की माला
हमारा तो छोडिये इन्होने देश का भी मुह काला कर डाला.